दादरी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप तेज, डीएम व एसडीएम को सौंपे गए तीन अलग-अलग प्रार्थना पत्र

धौलाना एनटीपीसी दादरी
ग्रेटर नोएडा/दादरी: तहसील दादरी क्षेत्र के ग्राम पयावली ताजपुर और चक्र सिद्धीपुर में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर गरमा गया है। वन विभाग, सिंचाई विभाग तथा ग्राम सभा की भूमि पर एक निजी बिल्डर द्वारा वेयरहाउस निर्माण के नाम पर कब्जा किए जाने के आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों ने प्रशासन को तीन प्रार्थना पत्र सौंपे हैं।
बता दें कि अधिवक्ता देवेंद्र ने जिला अधिकारी गौतम बुद्ध नगर को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि ग्राम चक्र सिद्धीपुर में विभिन्न 215/218/227/229 गाटा संख्या नंबरों की सरकारी भूमि पर वेयरहाउस निर्माण के लिए अवैध कब्जा किया जा रहा है। पत्र में दिए गाटा संख्या की जमीन को तत्काल खाली कर वन विभाग को सौंपा जाए तथा सरकारी जमीन को कब्जा करने में सभी सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उन्होंने अपने शिकायत पत्र में की है तत्काल कब्जा मुक्त कराने और निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
वहीं, दूसरी ओर चक्र सिद्धीपुर की प्रधान राजबाला द्वारा उपजिलाधिकारी दादरी को दिए गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिन खसरा नंबरों का विवरण पत्र में दिया गया है, उन पर वेयरहाउस संचालकों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। प्रधान शिकायत में बताया कि दिये गए घाटा संख्या में वन विभाग के लिए आरक्षित जमीन को भी वेयरहाउस वालों ने घेर लिया है प्रशासन से मौके की जांच कर अवैध निर्माण को रोकने और ग्राम सभा की भूमि को मुक्त कराने की मांग की है।
इसी क्रम में ग्राम पयावली ताजपुर से किसान नेता भगत सिंह ने जिला अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर तालाब की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खसरा संख्या 232 में 5570 मी तालाब के लिए आरक्षित सहित अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से तालाब की भूमि को तत्काल खाली कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
तीनों प्रार्थना पत्रों में एक ही बिल्डर पर अलग-अलग स्थानों पर सरकारी भूमि कब्जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक संपत्ति को बड़ा नुकसान हो सकता है।
वन विभाग के एनटीपीसी रेंज के रेंजर से बात करने पर उन्होंने बताया कि जो प्रार्थना पत्र में नंबर दिए गए हैं उन नंबरों की जांच कराई जाएगी जांच के उपरांत अगर वह जमीन पेड़ों के लिए आरक्षित है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी

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