देहरादून:(जीशान मलिक) उत्तराखंड के सपूतों ने एक बार फिर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की 16 सदस्यीय टीम ने 23 मई 2026 को सुबह 3:26 बजे नेपाल समय पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट 8,848.86 मीटर पर तिरंगा लहरा दिया।
खास बात यह है कि टीम ने काठमांडू से सिर्फ 20 दिन में एवरेस्ट फतह कर लिया, जो एवरेस्ट अभियानों के इतिहास में दुर्लभ रिकॉर्ड माना जा रहा है।
इस अभियान का नेतृत्व इंद्रापुर, देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट ने किया। वह मूल रूप से घनसाली, टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं और दिनेश प्रसाद भट्ट के पुत्र हैं।
Expedition Deputy Leader की भूमिका में पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कंडाई निवासी सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी रहे। वह शंभू प्रसाद बेबनी के पुत्र हैं।
शिखर पर पहुंचने वाले अन्य उत्तराखंडी जवान:
- नायक राहुल सिंह ग्राम सेरा, चमोली। पिता कुंवर सिंह
- नायक पंकज सिंह दोसाद ग्राम ल्वेशाल, अल्मोड़ा। पिता केशर सिंह दोसाद
- कमांडो गौतम बुटोला उत्तरकाशी
यह सफलता अचानक नहीं मिली। अक्टूबर 2025 में मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में ही टीम ने गढ़वाल हिमालय की माउंट सतोपंथ 7075 मीटर चोटी फतह की थी। इसके बाद लाहौल-स्पीति में डोगरा स्काउट्स के साथ कड़ाके की सर्दी में बर्फ प्रशिक्षण लिया और माउंट कानामो 5975 मीटर पर भी तिरंगा लहराया। महीनों की प्लानिंग, सैन्य अनुशासन और तकनीकी तैयारी ने एवरेस्ट की राह आसान की।NSG प्रवक्ता ने कहा कि यह मिशन NSG के ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ ध्येय का जीवंत उदाहरण है। मेजर अखिलेश भट्ट और उत्तराखंड के जवानों ने माइनस तापमान और तेज हवाओं के बीच जिस हौसले से टीम को शिखर तक पहुंचाया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।उत्तराखंड सरकार ने सभी जवानों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ों की गोद में पले इन बेटों ने साबित कर दिया कि देवभूमि का जवान जब ठान ले तो एवरेस्ट भी झुक जाता है।
