
देहरादून:(जीशान मलिक/असलम साबरी)उत्तराखंड में स्थाई राजधानी को लेकर उठक-पठक की स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि राज्य आंदोलन के दौरान गैरसैंण को प्रस्तावित राजधानी के रूप में घोषित किया गया था, लेकिन अभी तक इसे स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिला है. देहरादून को फिलहाल अंतरिम राजधानी बनाया गया है।
उत्तराखंड राज्य की स्थापना 9 नवंबर 2000 में हुई थी, और इसके लिए आंदोलन के दौरान गैरसैंण को राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया था। राज्य बनने के बाद देहरादून को अंतरिम राजधानी बनाया गया, और तब से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है।
सुराज सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी लाखों कार्यकर्ताओं के साथ ने विधानसभा देहरादून कुच किया।लेकिन भारी पुलिस फोर्स ने बेरिंग गेट लगाकर कार्यकर्ताओं को आगे जाने नहीं दिया।कार्यकर्ताओं व पुलिस के बीच तनातनी देखने को मिली प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने बडी मशक्कत हाथापाई के साथ बेरिंग गेट पर चढ़कर सुराज सेवा दल झंडा फहराकर विरोध प्रदर्शन जाहिर किया।
सराज सेवादल के वरिष्ठ नेता इंतजार प्रधान पीरपुरा ने कहा कि गैरसैंण को राजधानी बनाने के पक्ष में कई तर्क दिए जाते हैं।जैसे कि यह राज्य के केंद्र में स्थित है और पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक सुलभ है।जबकि देहरादून मैदानी क्षेत्र में स्थित है और पहाड़ी क्षेत्रों से दूर है। इसके अलावा, गैरसैंण को राजधानी बनाने से पहाड़ी क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.पहाड़ियों का पलायन बंद होगा।और उत्तराखंड के मैदानी व पहाडी दोनो क्षेत्र का विकास होगा।
इंतजार प्रधान ने सरकार व विपक्ष के नेताओं को आडे हाथो लेते हुए कहा कि दोनो पार्टी ने केवल राज्य मे मनमानी काम किये है।इंतजार प्रधान ने अपने क्षेत्र व गांव पीरपुरा की समस्याओं को लेकर भी वह मौजूद औलाधिकारियों के संज्ञान दिया।
