
हरिद्वार:(जीशान मलिक)सुबह का सन्नाटा अचानक चीख-पुकार में बदल गया… सलेमपुर गांव का शांत माहौल 9 साल के सुभान उर्फ़ ‘गोलू’ की मौत से दहल उठा। चंद मिनटों की लापरवाही ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी और पूरे गांव को दहशत में डाल दिया।
घड़ी में 9:30 बजे का समय… गोलू तालाब के किनारे खेलते-खेलते अचानक पानी में समा गया। देखते ही देखते लहरों ने मासूम को निगल लिया। गांव के लोग दौड़े, चीखते-चिल्लाते तालाब में कूद पड़े। मिनटों की जद्दोजहद के बाद बच्चे को बाहर निकाला गया, सांसें अभी बाकी हैं या नहीं, ये जानने की बेचैनी सभी के चेहरों पर साफ दिख रही थी।
बिना देर किए ग्रामीणों ने उसे श्री स्वामी भूमानन्द अस्पताल पहुंचाया। लेकिन किस्मत पहले ही अपना फैसला सुना चुकी थी – डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
गांव में अब सिर्फ मातम और आक्रोश है। लोगों की आंखों में आंसू हैं और दिल में सवाल – आखिर कब तक ऐसे तालाब मासूम जिंदगियां निगलते रहेंगे? ग्रामीणों ने तालाब को तुरंत बंद करने और उसकी जगह अस्पताल बनाने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि प्रशासन वर्षों से इस मुद्दे पर आंख मूंदे बैठा है और गांव के विकास व सुरक्षा की लगातार अनदेखी की जा रही है।
सलेमपुर का ये तालाब अब सिर्फ पानी का गड्ढा नहीं, बल्कि खतरे का प्रतीक बन गया है… और सवाल हवा में तैर रहा है – क्या गोलू की मौत के बाद भी जिम्मेदार जागेंगे?
