
ये दोनों पुलिस लाइन में तैनात थे जिनकी ड्यूटी जेल से हवालात में बंदियों की पेशी में थी।
ये दोनों 4 अक्टूबर को डासना जेल पहुंचे और वहां पर 6 बंदियों में से केवल 1 बंदी बिजेंद्र को नोएडा पेशी पर ले जाने पर अड़े।
जेल अधीक्षक को शक हुआ तो उन्होंने इसकी जांच कराई तो पता चला कि दोनों सिपाही निजी गाड़ी से बंदी को लेने पहुंचे थे और उस दिन गौतमबुद्धनगर पेशी के लिए उनकी कोई रवानगी पुलिस लाइन के रिकॉर्ड्स में थी ही नहीं।
पुलिस के बड़े अफसरों को इसकी जानकारी दी गई तब जाकर रिजर्व इंस्पेक्टर पुलिस लाइन ने कविनगर थाने में दोनों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवाई जिसमें आरोप है कि दोनों सिपाहियो ने वंश नाम के बंदी को भगाने की साजिश रची थी।
