देहरादून। (जीशान मलिक)उत्तराखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के हजारों लाभार्थियों का अपने घर का सपना अधर में लटका नजर आ रहा है। योजना के तहत मिलने वाली पहली और दूसरी किस्त जारी न होने के कारण प्रदेश भर में निर्माण कार्य ठप पड़ा है। मानसून की दस्तक से पहले छत न डल पाने की स्थिति में लाभार्थियों को अपना निवेश और मेहनत बर्बाद होने का डर सता रहा है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में लाभार्थियों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कई परिवारों को अभी तक पहली किस्त का भी इंतजार है, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनकी दूसरी किस्त शासन स्तर पर अटकी हुई है। बजट के अभाव में कहीं सिर्फ नींव खुदी है, तो कहीं दीवारों के बाद काम रुक गया है। लाभार्थियों का कहना है कि यदि बारिश से पहले छत नहीं पड़ी, तो कच्ची दीवारें ढह सकती हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा।
निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों ने लाभार्थियों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा तय की गई किस्त की राशि में पहले ही घर बनाना चुनौतीपूर्ण है, ऊपर से समय पर भुगतान न होने के कारण काम शुरू करना भी नामुमकिन हो गया है। एक पीड़ित लाभार्थी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “पहली किस्त का ठिकाना नहीं और दूसरी का पता नहीं। मानसून सिर पर है, डर है कि कहीं हमारी नींव भी बारिश में न बह जाए।”
क्षेत्र के प्रभावित लोगों ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि केंद्र के साथ तत्काल समन्वय स्थापित कर लंबित किस्तों को जारी किया जाए। लाभार्थियों की मांग है कि मानसून के सक्रिय होने से पहले किस्तों का भुगतान सुनिश्चित हो, ताकि वे अपने सिर पर छत डाल सकें। लोगों का तर्क है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो केंद्र की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य ही विफल हो जाएगा और गरीबों का आशियाना महज एक सपना बनकर रह जाएगा।
