गाड़ी वर्कशॉप में काम करने वाले के बेटे ने कर दिखाया कमाल-जानिए कैसे

पिरान कलियर:(ज़ीशान मलिक)
“सपने वही सच होते हैं जिनके लिए नींद कुर्बान की जाए” — इस कथन को चरितार्थ किया है। हरिद्वार ज़िले के ग्राम रहमतपुर,निवासी मौ० आज़म ने। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले मौ०आज़म का चयन देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में बी.ए. (ऑनर्स) इकोनॉमिक्स कोर्स के लिए हुआ है।

मौ० आज़म के पिता मौ० ईनाम एक वाहन वर्कशॉप में कार्यरत हैं। आर्थिक रूप से सीमित होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज़म ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि मेहनत और संकल्प के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

आज़म ने कहा, “मैंने संघर्ष जरूर किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। मेरे माता-पिता की मेहनत और दुआओं ने मुझे यहां तक पहुँचाया है। हंसराज कॉलेज में दाखिला मिलना मेरे लिए सपना सच होने जैसा है।”

हंसराज कॉलेज, जो कि DU के टॉप कॉलेजों में गिना जाता है, वहां दाखिला मिलना आसान नहीं होता। मौ० आज़म की यह सफलता न केवल उनके माता-पिता बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व का विषय बन गई है। यह उपलब्धि उन सभी ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले युवाओं को प्रेरणा देती है जो बड़े लक्ष्य रखते हैं।

गांव में खुशी का माहौल है, रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। मौ० आज़म ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत पूरी हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं।

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